कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में इंडी गठबंधन चुनाव आयोग पर मतदाता सूचियों के विशेष गहनपुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आक्रामक है। एसआईआर को वोट चोरी का माध्यम बताकर मुख्यचुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। धरना प्रदर्शन चल रहाहै। एक दिन तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी जबरन आकाशवाणी भवन में घुसनेका प्रयास करने लगे, अब तो ये लोग हर दिन संविधान की किताब हाथ लेकर कही न कहीं जबरन धरना देने का प्रयास कर रहे हैं। इन धरनाप्रदर्शनों  की तस्वीरें अत्यंतदुर्भाग्यूपर्ण हैं जिनमें राहुल गाँधी महिला पुलिस अधिकारी को आपत्तिजनक तरीके सेपकड़ रहे हैं और प्रियंका गाँधी दूसरी महिला पुलिस अधिकारी को कोहनी मार रही हैं। स्थानस्थान पर महिला पुलिस के साथ अभद्र व आपत्तिजनक व्यवहार किया जा रहा है।दिल्लीपुलिस में दस हजार से अधिक महिलाएं हैं। अधिकतर महिलाएं ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं।यूपी, बिहार,उत्तराखंड व झारखंड जैसे राज्यों से यह महिलाएं आती हैं। यह महिलाएं अपना कर्तव्यनिभा रही हैं और संविधान के दायरे में काम कर रही हैं। इन महिला पुलिसकर्मियों केसाथ कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता अभद्र हरकतें कर रहे हैं। ऐसे कई वीडियो सोशलमीडिया पर उपलब्ध हैं। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस पर 25 आपत्तिजनक प्रहार किये गये हैं। यही नहीं ईवीएम कीप्रशंसा करने पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने  जम्मू कश्मीर के युवक की पिटाई कर दी। यहीकांग्रेस का असली  चरित्र है- अराजकता। कांग्रेसअपने इंडी गठबंधन के साथ मिलकर देश में अराजकता का  वातावरण बनाकर चुनाव जीतना चाहती है। चुनावआयुक्त व एसआईआर के विरुद्ध कांग्रेस के पास कोई तथ्य अथवा प्रमाण  नहीं है। राहुलगांधी तथा इंडी गठबंधन  बिहार विधानसभाचुनाव से लेकर अब तक तीन बार मतदाता गहन परीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ आंदोलन कर चुकाहै और हर बार उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा है। बिहार की जनता ने इस मुद्दे कोपूरी तरह से नकार दिया था। देश के कई राज्यों में एसआईआर का काम पूर्ण हो चुका है। एसआईआर प्रक्रिया में चुनावआयोग के द्वारा नियुक्त  अधिकारियों  सहित सभी राजनैतिक दलों के बूथ एजेंट आदि नेअत्यंत सक्रियता के साथ इस कार्य में भागीदारी की। आश्चर्यजनक रूप से अभी तक राहुलगांधी के बूथ अध्यक्ष व बीएलए आदि को यह नहीं पता चला था कि चुनाव आयुक्त ने फार्म-6 में कोई बदलाव कर दिया है। कांग्रेस व उसकेसहयोगी दलों का वर्तमान आंदोलन दोहरे मापदंडों पर आधारित है क्योंकि एसआईआर के काममें सभी दलों ने चुनाव आयेाग का सहयेाग किया है और बढ़-चढ़ कर  भागीदारी की है। चुनाव आयोग ने अब सभी बीएलओ कोघर -घर जाकर फिर से नये मतदाताओं का फार्म भरवाने का अभियान प्रारंभ किया है औरउसमें भी सभी राजनैतिक दल सहयेाग कर रहे हैं। चुनाव आयेग ने उन सभी पात्र मतदाताओं को अपना नाम फिर से जुड़वाने का अवसर दियाहै जिनका नाम एसआईआर प्रक्रिया में किसी कारणवश छूट गया है । इन सभी सुधारों के बादभी राहुल गांधी सड़क पर अराजकता मचाने पर उतारू हैं, यहदोहरा मापदंड नहीं तो और क्या है?वास्तविकतायह है कि राहुल गाँधी की भारत की संवैधानिक संस्थाओं कोई आस्था ही नहीं है। यहीकारण है कि भारतीय लोकतंत्र को वैश्विक स्तर पर बदनाम करने के लिए लोकतंत्र की प्रहरीसंस्था चुनाव आयोग पर ही हमला कर रहे हैं। राहुल गांधी, अपने आंदोलन के माध्यम से अराजकताफैलाकर भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसी स्थितियों में पहुंचकर सत्ता प्राप्तकरना चाहते  हैं। मतदातासूची के पुनरीक्षण का विरोध एक षड्यंत्र के अंतर्गत किया जा रहा है। कई राज्योंमें मतदाता सूची में फर्जी नामों के सहारे फर्जी मतदान करवाने की घटनाएं सामने आतीरहती थीं। विपक्षी दल केवल बांग्लादेशी घुसपैठियों  व रोहिंग्या के के नाम मतदाता सूचियों मेंरखवाने के लिए लड़ रहे है। यह दल अच्छी तरह से समझते हैं कि मतदाता सूची में उनलोगों का नाम तो हटता ही है जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है और उन मतदाताओं का भीहटता है  जो अपने मूल निवास स्थान सेअन्यत्र स्थानांतरित हो जाते हैं। नए मतदाता जोड़ने का अभियान चलता ही रहता है फिरइसमें आखिर समस्या कहाँ है?  क्या जो लोगविरोध कर रहे हैं वह यह चाहते हैं कि उनके स्वर्गीय माता -पिता व बंधु ऊपर से धरतीपर आकर वोट डालें  और उन्हें चुनाव जिताकरवापस चले जाएं?कांग्रेसव विरोधी दलों का यह आंदोलन  इंडियनएक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के आधार पर  शुरूहुआ है जिसका न कोई आधार है और न ही तथ्य। अब तो चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट कर दियाहै कि चुनाव आयोग में सभी फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं और यही बात वहसुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई के दौरान कहनेजा रहा है। कांग्रेसवोट चोरी का अभियान का एक उद्देश्य अपने ध्वस्त हो चुके संगठन को खड़ा करना भी है। यहपार्टी अब अपने बलबूते त्रिपुरा में मतपत्रों के माध्यम से हुए ग्राम सभाओं केचुनाव व असम में नगर नकाय चुनाव जीतने तक की हैसियत खो चुकी है। आन्दोलन के दौरानआए 5 विधानसभा व असम की एक लोकसभा का उपचुनाव भीकांग्रेस  बुरी तरह से हार गई है। वर्ष 2027 में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा सहित बाद में गुजरात आदि राज्यों में विधानसभाचुनाव संभावित हैं इन सभी राज्यों में कांग्रेस का बुरा हाल होने जा रहा है।कांग्रेस चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित पुरानी वोटर लिस्ट से चुनाव कराने  की मांग कर रही है जो पूरी तरह से तर्कहीन है।अगर पुरानी मतदाता सूची से चुनाव करा भी दिये जाएं तो क्या मरे हुए लोग वोट डालने आजायेंगे ? सच तो यह है कि कांग्रेस पार्टी उससे भी चुनाव नहीं जीतेगी क्योंकि 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव पुरानी मतदाता सूची से ही कराए गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट चोरी का आरोप तोपूरी तरह से गलत है क्योंकि तब ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त थे ही नहीं। इंडीदलों विरोध  प्रदर्शन के बीच एक सकारात्मकबात यह हुई कि चुनाव आयोग को 42 पूर्व न्यायाधीशों और  सेवानिवृत्त अधिकारियों का समर्थन प्राप्त होगया है। सभी ने मतदाता सूचियों  के विशेषगहन पुनरीक्षण की वैधानिकता को अपने तर्कों से पुष्ट करते हुए संवैधानिक संस्थाओंपर लगातार हमलों पर चिंता जताई है। इन महानुभावों द्वारा देशवासियों  के नाम खुले पत्र के माध्यम से  हर भारतीय से इन संस्थाओं के समर्थन व बचाव मेंआगे आने का आह्वान किया गया है।  वैसेभी जब चुनाव आयुक्त  की नियुक्ति सहित सभीमामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तब गांधी परिवार व कॉकरोच जनता पार्टी का यहआंदोलन पूरी  तरह से असंवैधानिक औरदुर्भाग्यपूर्ण है।