शनिवार को ताज प्रेस क्लब के सहयोग से साहित्य भूषण पं. प्रताप दीक्षित जयंती समारोह के तहत हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाकर सर्द भरे माहौल में गर्मी भरने का काम किया।
तेवर बकरार रखते हुए उन्होंने आगे पढ़ा कि- तुम्हारी बिजलियां गिरकर जो मेरा घर जलाएंगीं, मेरी खामोशियां ये दास्तां सबको सुनाएंगी। अध्यक्षता करते हुए विख्यात गीतकार डा. सोम ठाकुर ने सर्दियों को प्रेम से जोड़ते हुए -'दूरियां-दूरियां-दूरियां हैं, तुम कहां हो बड़ी सर्दियां हैं' पढ़कर खूब तालियां बटोरीं। विख्यात कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने ‘शिकारी तुम शिकारी हम, मुनासिब है नहीं लड़ना, चलो इक काम करते हैं, इलाका बांट लेते है’ सुनाकर सभी की तालियां बटोरीं। संचालन कर रहे उज्जैन के नरेंद्र सिंह 'अकेला' ने पढ़ा कि- सुनो राधा हमारे प्रेम का परिणाम आयेगा, मुझे जब भी पुकारोगी तुम्हारा श्याम आयेगा। मुझे सब लोग पूजेंगे मगर इतना समझ लेना, हमारे नाम से पहले तुम्हारा नाम आयेगा। धौलपुर की रजिया बेगम 'जिया' ने प्रेम को कुछ इस तरह बयां किया कि- अगर आएं कई तूफां, वे टकरा कर गुजर जाएं। मुहब्बत पा के यारा की, मधुर लम्हे संवर जाएं। डा. राजकुमार रंजन ने- 'हम जीते तो जीत तुम्हारी हम हारे तो हार, इक दूजे के हाथों में इक दूजे की पतवार' को तरन्नुम में पढ़कर खूब वाहवाही पाई। रामेंद्र मोहन त्रिपाठी और डा. सीपी राय ने स्व. दीक्षित से जुड़े संस्मरण सुनाए। कमल गुप्ता विश्वबंधु इंदौर, डा. त्रिमोहन तरल, विनोद सांवरिया बाह, अमीर अहमद ने भी काव्य पाठ किया। मुख्य अतिथि उद्योगपति महेंद्र गोयल, उद्घाटन सूरजभान अग्रवाल ने किया।
इससे पूर्व गीतकार सोम ठाकुर, प्रख्यात कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी, ताज प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज मिश्र, महासचिव केपी सिंह ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती और स्व. प्रताप दीक्षित के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन और माल्यार्पण कर शुभारंभ किया। इस मौके पर क्लब के अध्यक्ष सुनयन शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। कवि सम्मेलन के संयोजक राजेश दीक्षित ने सभी कवियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर सचिव पवन तिवारी, यतीश लवानियां, कार्यकारिणी सदस्य शरद शर्मा, मनोज गोयल ने भी सहयोग किया।
ताज प्रेस क्लब के सहयोग से पं. प्रताप दीक्षित जयंती के तहत काव्य समारोह
आगरा। 'तुम्हारे पत्थरों से अब मेरे शीशे नहीं डरते, इन शीशों की किरचें रोज तुमको मुंह चिढ़ाएंगी।' ताजनगरी की लाड़ली कवयित्री डा. शशि तिवारी के तेवर जब इन कविताओं के जरिए बाहर आए तो श्रोताओं के हाथ खुल गए।
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