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दुःख में भगवान का स्मरण ही बनती है पतवार- जैन मुनि डॉ मणिभद्र महाराज धर्म-संस्कृति

दुःख में भगवान का स्मरण ही बनती है पतवार- जैन मुनि डॉ मणिभद्र महाराज

आगरा वर्षा वास के दौरान हो रहे भक्तामर स्रोत अनुष्ठान में जैन मुनि डॉण् मणिभद्र महाराज ने कहा कि भक्त अपने को कभी बड़ा नहीं कहता है। वह तो अपने को सबसे छोटा मानता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण श्रीराम भक्त हनुमान जी हैंए जो अपने को हमेशा प्रभु का दास ही बताते रहे। यही नहींए लक्ष्मण जी ने अपने हमेशा अपने को बहुत छोटा माना है।

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मोबाइल ने खत्म कर दी अतिथि भाव की परंपरा-जैन मुनि मणिभद्र धर्म-संस्कृति

मोबाइल ने खत्म कर दी अतिथि भाव की परंपरा-जैन मुनि मणिभद्र

आगरा 7 अगस्त। संसार में सबसे दुर्लभ कार्य है निस्वार्थ भावना से दान देना। देने वाला दाता और पाने वाला पाता  होता है। यदि देने वाला अंहकार से भरा हुआ हो और लेने वाला संतुष्ट नहीं हो, उसे लोभ हो तो फिर दान देने का कोई लाभ नहीं है। यदि दाता और पाता पवित्र भावना वाले हों तो दोनों ही मोक्ष को प्राप्त करते हैं। यह प्रवचन रविवार को राजामंडी स्थित जैन भवन, स्थानक में नेपाल केसरी व मानव मिलन परिवार के संस्थापक जैन मुनि डॉ.मणिभद्र महाराज ने दिए। उन्होंने कहा कि जैन धर्म अतिथि सेवा का विशेष महत्व है। जिस

3 वर्ष पहले 1.2K 2 मिनट
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