मुगल रोड कमला नगर आगरा पर लगाई गई मीठे शर्बत की प्याऊ 
आगरा - मुहर्रम की 10 तारीख, यौम-ए-आशूरा के मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों ने नम आंखों से हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की शहादत को याद किया। शहर में सुबह से ही मातमी धुनों और "या हुसैन" की सदाओं के बीच अकीदत का माहौल रहा। आगरा की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक, पायचौकी और कटरा दबकियान से ऐतिहासिक फूलों के ताजिए निकाले गए। रंग-बिरंगे फूलों से सजे ये ताजिए कला और अकीदत का संगम नजर आए। हजारों की भीड़ के साथ ये ताजिये शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कर्बलाओं की ओर रवाना हुए। 
जुलूस में शामिल अजादार सीनों पर मातम करते हुए, नोहाख्वानी और मर्सिया पढ़ते हुए चल रहे थे। हर ओर "लब्बैक या हुसैन" की गूंज थी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर भावुक हो रहे थे।  इस दौरान ताजिए के रास्तों पर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की भी खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।

मुगल रोड कमला नगर आगरा पर शमी कुरैशी पूर्व शहर अध्यक्ष सममजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी और मुग़ल मार्केट एसोशिएशन के द्वारा मीठे शर्बत की प्याऊ लगाई गई। इस अवसर पर प्रदेश सचिव समाजवादी पार्टी एवं उत्तर विधान सभा प्रभारी नितिन कोहली का साफा बाँध कर स्वागत किया गया।  इस दौरान जलूस में शामिल ताजियेदारों / खलीफाओं का भी पुरूस्कार और साफा बाँदकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर शमी कुरैशी ने कहा  कि शहर में कई जगहों पर हिंदू भाइयों ने जुलूस में शामिल लोगों के लिए पानी और शरबत की सबीलें लगाईं। ताजियेदारों पर फूल बरसाए गए हैं । आगरा ने एक बार फिर साबित किया कि यहां का भाईचारा सदियों पुराना और मजबूत है। मुहर्रम के जुलूस और ताजियों के दौरान शहर भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। बड़ी संख्या में पुलिस के जवान और प्रशासन के अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद दिखे। 
कर्बला पहुंचकर ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले मुस्लिम समाज के लोगों ने मुल्क में चैन-ओ-अमन, भाईचारे और तरक्की के लिए हाथ उठाकर दुआ मांगी। आगरा का यह मुहर्रम अकीदत, अनुशासन और आपसी सौहार्द की एक और मिसाल बनकर सामने आया है।  इस अवसर पर सलीम उस्मानी पूर्व पार्षद ,साविर अली , बुंदन मौलाना, मो०नसीम , अब्दुल गफ्फार , लियाकत अली आदि लोग मौजूद रहे।