आगरा- यादें हसन कार्यक्रम के दूसरे दिन अजमेर शरीफ से लाया गया हसनी आलम एवं गरीब नवाज की चादर का जुलूस दरगाह हजरत शाह अमीर आबूल उलाह की पुलिया से बड़े ही शान शौकत के साथ निकाला गया जुलूस की अध्यक्षता कर रहे दरगाह सैयदना सरकार के सज्जादा नाशी सैयद मोहतशिम अली अबुल उलाई जुलूस के मेहमाने खुसुसी मेवा कटरा खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाजिया के सज्जादा नाशी हजरत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह कादरी नियाजी वहीं संस्था उस्मानी मुइनी गुदड़ी शाही अजमेर से आए सर परस्त हजरत इनाम हसन गुदड़ी शाह बाबा पंजूम अजमेरी चल रहे थे l
आलम का जुलूस दरगाह की पुलिया से होता हुआ दरगाह सैयदना सरकार तक काफी श्रद्धालु ऑन के साथ पहुंचा दरगाह पर जिक्र इमाम हसन किया गया वहीं बाद नमाज मगरिब दरगाह के गुंबद पर हसनी आलम को लगाया गया सैयदना सरकार पर ख्वाजा गरीब नवाज की चादर पेश की गई फातिहा भी पढ़ी गई फातिहा के बाद लंगर तकसीम किया गया आए हुए सभी श्रद्धालुओं से हजरत इनाम हसन ने कहा कि मौला इमाम हसन यह जिस तरह से अपनी पूरी जिंदगी दुनिया में रहते हुए गुजरी है मौला इमाम हुसैन की जिंदगी को देखते हुए हमको भी मौला इमाम हसन के बताए रास्ते पर चलना चाहिए l
मौला इमाम हसन ने हमेशा रात मैं जिन लोगों के यहां खाने का सामान नहीं होता वह अपने कंधे पर रखकर उनके घर के दरवाजे पर रखकर चले आते मौला इमाम हसन ने हमेशा सच्चाई का पैगाम दिया क्योंकि मौला इमाम हसन अल्लाह के महबूब हजरत मोहम्मद साहब के बड़े नवासे थे आप मौला इमाम हसन को शहीद करने वाले भी मौला इमाम हुसैन के अपने थे सन हिजरी 49 को मौला इमाम हसन को शहीद किया गया मौला इमाम हसन को खाने में जहर देकर शहीद किया गया था खाने में जहर देने का सिलसिला लगभग 40 दिनों तक चला रहा मौला इमाम हसन जब भी खाना खाते उन्हें यह मालूम हो जाता की इस खाने में जहर मिला दिया गया है आप अपने नाना जान अल्लाह के महबूब हजरत मोहम्मद साहब की मजार पर जाते और वहां जाने पर ही उसे शहर का असर खत्म हो जाता लेकिन लगभग 40 दिन के बाद मौला इमाम हसन को मना कर दिया गया अब आप मेरे पास ना आए मौला इमाम हसन 28 सफर सन हिजरी 49 को इस दुनिया से चले गए कार्यक्रम के मेहमान ए खुसुसी हजरत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह ने कहा की मौला अली के लाडले साहबजादे मौला इमाम हसन की मोहब्बत अगर हमारे दिलों में रहेगी तो मौला इमाम हसन के वसीले से अल्लाह तबारक ताला हम सभी को इस दुनिया से बड़ी जन्नत अता फरमाएगा क्योंकि खुद कुरान में अल्लाह तबारक ताला ने कह दिया कि मौला इमाम हसन मौला इमाम हुसैन जन्नत के नौजवानों के सरदार हैं मौला इमाम हसन जिसको चाहेंगे l
अल्लाह का वही बांदा जन्नत में जाएगा अगर हम सभी को जन्नत में जाने वाला बना है तो हमारे दिलों में मौला इमाम हसन की मोहब्बत होनी चाहिए दुनिया में रहते हुए अगर हम सभी पंचतंत्र पार्क की मोहब्बत अपने दिलों में रखेंगे तो ही कल हश्र के मैदान में मौला इमाम हसन अपने नाना जान अल्लाह के महबूब हजरत मुहम्मद साहब और अल्लाह से हम गुनहगारों की सिफारिश करेंगे और अपने साथ जन्नत में ले जाएंगे इसलिए मौला इमाम हुसैन की शहादत की तारीख 28 सफर को हम सभी अपने-अपने घरों में फातिहा दिलाई और मौला इमाम हसन की मोहब्बत अपने दिलों में पैदा करें जिससे कि हमारी दुनिया भी सफल हो जाए और आखिरत भी सफल हो जाए कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने वालों में हाजी मोहम्मद तौफीक सैयद मुबारक अली मोहम्मद जमील मोहम्मद अमीन जियाउद्दीन हाशमी सैयद अमजद हुसैन राजू बबलू वकील उद्दीन फरहानुद्दीन हाजी सरफराज खान शकील उद्दीन अच्छे भाई फरमान खान पत्रकार कुंवर अख्तर कप्तान आदि सैकड़ो लोग उपस्थित रहे l




