वार्ड 13 कछपुरा की पार्षद इमराना अब्बास परिवार सहित उमरा के लिए रवाना
कछपुरा पार्षद 8 अगस्त से 27 अगस्त तक 20 दिन के उमरा के लिए
लोग हज-उमरा क्यों जाते हैं। आस्था, सुकून और गुनाहों की माफी की तलाश के लिए, कछपुरा वार्ड से पांच लोगों का गया जत्था
गुनाहों की माफी से लेकर भाईचारे तक - क्यों जाते हैं लोग मक्का, हज-उमरा सिर्फ तीर्थ नहीं, आत्मिक शुद्धि का सफर
कछपुरा पार्षद इमराना अब्बास परिवार सहित उमरा पर, क्षेत्र में खुशी, पार्षद इमराना अब्बास ने पति और परिजनों के साथ की उमरा यात्रा
आगरा नगर निगम के वार्ड 13 कछपुरा की पार्षद इमराना अब्बास अपने पार्षद पति शब्बीर अब्बास के साथ परिवार के तीन अन्य सदस्यों शादिक अब्बास, नाविद अब्बास और मरजीना अब्बास सहित सऊदी अरब की पवित्र उमरा यात्रा पर गई हैं। परिवार के उमरा पर जाने की खबर मिलते ही वार्ड क्षेत्र में खुशी का माहौल हो गया। पार्षद के समर्थकों और शुभचिंतकों ने लोगों ने पार्षद दंपति और उनके परिवार के सकुशल लौटने की दुआएं भी कीं। इन दिनों आगरा से भी कई लोग पवित्र उमरा की यात्रा पर जा रहे हैं। वार्ड 13 कछपुरा की पार्षद इमराना अब्बास और पार्षद पति शब्बीर अब्बास भी परिवार सहित उमरा के लिए सऊदी अरब गई हैं। हर साल लाखों मुसलमान दुनिया भर से मक्का पहुंचते हैं।
आपको यह भी बता दें कि उमरा क्या है
उमरा इस्लाम धर्म में मक्का स्थित काबा की पवित्र तीर्थयात्रा है। इसे 'छोटा हज' भी कहा जाता है। हज के विपरीत इसे साल के किसी भी समय किया जा सकता है। यह जीवन में अनिवार्य नहीं, बल्कि नफ्ल इबादत है, लेकिन इसका बहुत अधिक आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मक्का की यात्रा को मुसलमान आत्मिक शुद्धि का जरिया भी मानते हैं।
उमरा करने के मुख्य चरण
आपको बता दें कि यात्रा से पहले पवित्र अवस्था में प्रवेश। पुरुष दो बिना सिले सफेद कपड़े और महिलाएं साधारण शालीन लिबास धारण करती हैं।
तवाफ - मस्जिद-ए-हरम में खाना-ए-काबा के चारों ओर 7 बार चक्कर लगाना। सई - सफा और मारवा की पहाड़ियों के बीच 7 बार चलना। हलक या तकसीर- पुरुष सिर मुंडवाते या बाल छोटे बाल कराते हैं।

आपको बता दें कि हज और उमरा में अंतर क्या है?
हज हर सक्षम मुसलमान पर जीवन में एक बार फर्ज है और यह इस्लामिक कैलेंडर के ज़िलहिज्जा महीने की तय तारीखों पर होता है। इसमें अराफात, मीना और कुर्बानी जैसी रस्में शामिल हैं। वहीं उमरा सुन्नत/मुस्तहब है और इसे सालभर कभी भी किया जा सकता है। यह भी है। अल्लाह का हुक्म और फर्ज की अदायगी-इस्लाम के 5 स्तंभों में हज एक है। हर सक्षम मुसलमान पर जीवन में एक बार हज फर्ज है। उमरा फर्ज नहीं लेकिन सुन्नत है। इसे अदा कर ईमान मजबूत होता है।
गुनाहों की माफी और आत्मिक शुद्धि -मान्यता है कि हज-उमरा करने से पिछले गुनाह माफ हो जाते हैं। काबा के सामने तवाफ और दुआ से दिल को सुकून और रूह को पाकी मिलती है।
हज और उमरा में फर्क
हज ज़िलहिज्जा की तय तारीखों पर होता है और इसमें अराफात, मीना, मुजदलिफा और कुर्बानी शामिल हैं। उमरा सालभर कभी भी किया जा सकता है और यह छोटा हज कहलाता है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि उमरा सिर्फ सफर नहीं है, बल्कि यह इंसान को तक्वा, सब्र और अल्लाह से करीब करने वाली इबादत करते हैं।
समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के पूर्व महानगर अध्यक्ष शमी कुरैशी ने वार्ड 13 की पार्षद इमराना और पार्षद पति शब्बीर अब्बास के परिवार सहित पवित्र उम्र यात्रा जाने पर बहुत बहुत खुशी जाहिर की और बधाई दी कि अल्लाह यात्रा को सफल बनाये।

