तीन दिवसीय 388 वॉ उर्स के तीसरे दिन महफिल ए रंग के साथ उर्स का समापन हुआ
कुल के वक़्त होती है अक़्सर दुआ कुबूल_ मियां मोहम्मद हूसैन रशीदी
आगरा हज़रत सय्यदना ओलिया बाबा रह0 का 388 वाँ उर्स बुज़ुर्गों की समस्त रस्म-ओ-रिवाज़ के साथ दरग़ाह सय्यदना हज़रत ओलिया बाबा रह0 छीपी टोला हन्ना गली आगरा में कुल की आखरी रस्म के साथ समापन हुआ ।
आज तीसरे दिन 13 अगस्त
सुबहा कुरान खानी 10 बजे कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई | उसके बाद रंग की महफ़िल हुई | महफिल के बाद लंगर तकसीम किया गया | सज्जादानशीं मियां मौहम्मद हुसैन रशीदी ने बताया के कुल शरीफ की जो हे वो उर्स एक खास घड़ी होती हे इसमे हर खास और आम की दुआ कुबूल होती है | कुल के अन्दर बुजुर्गों के इल्म जो सीना बा सीना मिलता हे उसको अपने मुरीदौ मे सीना बा सीना दीया जाता हे | कलु में एक ऐसी घड़ी होती । जिसमे अल्लाह का वली हर आने वाले पर अपनी रहमत की निगाह करता है । औऱ हर आने वाले जायरीन अपनी तमन्नाओं से मालामाल हो जाता है ।
कुल मे खुसूशी दुआ दरगाह के सज्जादानशीं पीर-ए-तरीक़त मियां मौहम्मद हुसैन रशीदी क़ादरी ,नकशबन्दी ,सन्दली इस्हाकी़क़ादरी ,नकशबन्दी ,सन्दली इस्हाकी़ ने कराई | अल्लाह की बारगाह में मुल्क मे आपसी भाई चारा कायम रहे | मुल्क मे अमनोअमान के साथ हर शख्स जिन्दगी बशर करे |
उर्स के कुल की महफ़िल में पीर-ए-तरीक़त सज्जादानशीं मियां मौहम्मद हुसैन रशीदी क़ादरी ,नकशबन्दी ,सन्दली इस्हाकी़ , भुल्ले शाह, पीर ज़ादा मौहम्मद उबार हुसैन, पीर ज़ादा मौहम्मद हस्सान ,सूफी इकबाल , सू, खादिम सुनील कुमार,मौहम्मद सुलतान ,मौहम्मद इस्माईल , मोहम्मद उस्मान, मौहम्मद इकराम , फरीद कादरी , मौहम्मद सुहेल, फ़ैज़ान उस्मानी भुल्लन , इदरीस उस्मानी ,शफी मोहम्मद ,रशीद , मोहम्मद असफाक, नसीर ,शाहीद ,महेश ,असरफ ,यूसुफ, वकील मोहम्मद असफाक ,नईम ,इंसाफ़, नेनु ,साबिर ,सद्दाम सलीम आरिफ ,बॉबी ,शक़ील, रोबिन जैन आदी उपस्थित रहे ।

