आगरा दरगाह हज़रत  शैख़ सय्यद अमजद अली शाह क़ादरी र.ज़ि पंजा मदरसा शाही,बांस दरवाज़ा आगरा वआस्ताना हज़रत मैकश  ख़ानक़ाह ए क़ादरिया चिश्तिया  नियाज़िया आगरा से सय्यद फैज़ अली शाह ने उर्स की जानकारी देते हुये बताया 23 अगस्त शाम 5बजे  गुस्ल की रस्म के साथ सज्जादा नशीन हज़रत अजमल अली शाह साहब की सरपरस्ती मे उर्स का आग़ाज़ होगा शाम 5बजे  दरगाह  हज़रत  शैख़ सय्यद अमजद अली शाह क़ादरी र.ज़ि पंजा मदरसा शाही,बांस दरवाज़ा आगरा पर गुस्ल होगा और रात 9बजे महफिल ए सिमा होगी जिसमे शहर और दिल्ली बरेली रामपुर  फिरोजाबाद से आये हुये क़व्वाल कलाम पेश करेगें
24 अगस्त को सुबह कुरान ख्वानी (कुरान का पाढ ) होगी उसके बाद महफिल ए सिमा और शाम 5:30 बजे अखिरी कुल की महफिल का आयोजन किया जायेगा जिसमे आगरा शहर के सूफी और अध्यात्मिक विॆचार धारा के लोग ख़ास तौर पर शिरकत करेंगे इसके अलावा ग्वालियर बिंड,अलीगढ ,फिरोज़ाबाद ,फतेहपुर सीकरी से आने वाले ज़ायरीन भी उर्स मे शिरकत करेंगे l
हज़रत सय्यद मुज़फ्फर अली शाह हुज़ूर सहिब आगरा में सूफी विचार धारा के महान गुरु है़ं जिन्होंने अंग्रज़ो के दौर मे सुफी अध्यात्म का प्रचार प्रसार किया जन समान्य को ईशवर प्रेम का मार्ग ना सिर्फ दिखाया बल्कि सैकडों लोगो को वहाँ तक पहुँचा भी दिया हुज़ूर साहब ने जीवन के 32 साल एक छोटे से कमरे मे दरवेशी मे इबादत करते हुये गुज़ारे.उनका सूफियाना कलाम सारी दुनिया मे कव्वाली के माध्यम से गाया जाता है वह सूफी शायर हैं,"अल्लाही" अकबराबादी तख़ल्लुस (शायरी मे नाम) है फारसी भाषा मे कलाम कहते थे आध्यात्म पर एक किताब 'जवाहरे ग़ैबी' उन की मशहूर रचना है l
दुनिया मे हुज़ूर साहब से प्रेम करने वाले मौजूद हैं 1882 मे आपकी आत्मा परमात्मा मे विलीन हो गई l 140 साल से आगरा मे उन की याद में उर्स मनाया जाता है हुज़ूर सय्यद मुज़फ्फर अली शाह साहब र.ह हज़रत मैकश अकबराबादी के दादा थे हज़रत सय्यद मोहम्मद अली शाह मैकश र.ह ने आप की रूहानी शिक्षा को आगे बढा़या आज भी उन के पौत्र सूफी गुरू हज़रत सय्यद अजमल अली शाह क़ादरी साहब सूफीवाद और मानव प्रेम की शिक्षा का प्रचार कर रहे हैं l