खून पूरा होने पर खतरे से बाहर हो जाते हैं जच्चा-बच्चा
चिकित्सक की सलाह के अनुसार लें पोषण आहार
आगरा, जच्चा और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के लिए गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच होना अनिवार्य है, इसके साथ ही इस दौरान चिकित्सक द्वारा दी जा रही दवाओं को समय पर लेना और सही पोषण आहार लेना गर्भवती के लिए आवश्यक है। इससे जच्चा व बच्चा दोनों प्रसव के दौरान होने वाले जोखिम से बाहर आ जाते हैं और स्वस्थ परिवार की नींव पड़ती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि गर्भावस्था के दौरान रक्त की कमी (एनीमिया) एक गंभीर समस्या है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। इसे नियंत्रित करने के लिए गर्भवती को पूरे 9 महीने में कम से कम चार बार रक्त जांच (हीमोग्लोबिन टेस्ट) कराना आवश्यक है। पीएमएसएमए दिवस पर एमबीबीएस चिकित्सक व स्त्रीरोग विशेषज्ञ द्वारा गर्भवती की जांच सुनिश्चित की जाती है। इस दिन बीपी, शुगर, हीमोग्लोबिन, पेशाब जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी सभी जरूरी जांचें की जाती हैं ताकि हाई-रिस्क गर्भावस्था को समय पर पहचाना जा सके।
यह जानकारी देते हुए डिप्टी सीएमओ (आरसीएच) डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने आमजन से अपील की है कि अपने परिवार व आसपास की गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच करने के लिए अवश्य प्रेरित करें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रसव पूर्व जांच के लिए प्रत्येक माह की 1, 9, 16 एवं 24 तारीख को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) और एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस आयोजित किया जाता है। यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निशुल्क प्रसवपूर्व देखभाल उपलब्ध कराना और गर्भवती को व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल उपलब्ध कराकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करना है।
डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि पीएमएसएमए दिवस के दौरान गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, आयरन एवं कैल्शियम की गोलियों का वितरण, आयरन सुक्रोज, अल्ट्रासाउंड, यूरिन, हीमोग्लोबिन, शुगर, सिफलिस, वजन, पेट की जांच, हेपेटाइटिस बी, ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्रुप, सीबीसी और एचआईवी, टीबी की जांच की जाती हैं।

जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. आशु ने बताया कि गर्भावस्था में संतुलित खान-पान और आयरन-फोलिक एसिड की नियमितता की अनदेखी मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ऐसे में खान-पान में लापरवाही और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की दवा का पूरा कोर्स न करने से एनीमिया का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, समय पर जांच, संतुलित आहार और नियमित उपचार के माध्यम से गर्भावस्था में एनीमिया की रोकथाम संभव है। गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत से ही अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और नियमित प्रसवपूर्व जांच करानी चाहिए।

समय पर जांच से खतरे की पहचान
स्त्रीरोग विशेषज्ञ ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन सहित आवश्यक स्वास्थ्य जांच कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। थकान, कमजोरी, चक्कर आना या सांस फूलना जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जांच में एनीमिया की पुष्टि होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेना आवश्यक है।
आयरन-फोलिक एसिड की गोली बीच में न छोड़ें
डॉ. आशु ने बताया कि चिकित्सक द्वारा निर्धारित आयरन-फोलिक एसिड की दवा को अपनी मर्जी से बंद न करें। कई बार दवा लेने के बाद होने वाली सामान्य असुविधाओं के कारण महिलाएं इसका सेवन बीच में ही छोड़ देती हैं। ऐसी स्थिति में दवा बंद करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेकर समस्या का उचित समाधान करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलिक एसिड की नियमित पूरकता को मातृ एनीमिया की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
थाली में बढ़ाएं पोषण की ताकत
आयुष्मान आरोग्य मंदिर जीवनीमंडी की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना शर्मा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को अपने भोजन में विविधता और पोषण का विशेष ध्यान देना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, राजमा, साबुत अनाज, मौसमी फल, मेवे और बीज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ नियमित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन और विभिन्न पोषक तत्वों से युक्त संतुलित आहार गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु, दोनों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
परिवार की भूमिका भी अहम
जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता संगीता भारती ने बताया कि गर्भवती महिला के पोषण और आराम की जिम्मेदारी केवल उसकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की है। परिवार को चाहिए कि गर्भवती के भोजन में पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करे, समय पर जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में सहयोग करे और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की दवा नियमित रूप से लेने के लिए प्रोत्साहित करे।


