- ज्योतिर्लिंग शिव के अनंत और सर्वव्यापी स्वरूप के प्रतीक
- विश्व सनातन ट्रस्ट की ओर से चल रही सप्तदिवसीय शिवपुराण कथा का हुआ व्यास पूजन और भंडारे के साथ समापन
आगरा। जो श्रद्धापूर्वक द्वादश ज्योतिर्लिंगों का स्मरण, दर्शन या पूजन करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं, मन शुद्ध होता है और भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख, शांति तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान शिव एवं ईश्वर भक्ति के विभिन्न स्वरूप हैं, जो मनुष्य को धर्म, सदाचार और मोक्ष के मार्ग पर ले जाते हैं। ये उद्द्गार विश्व सनातन ट्रस्ट की ओर से कमला नगर स्थित सुभाष नगर चौराहे पर चल रही शिव पुराण कथा मे व्यास पीठासीन कार्ष्णि मयंक उपाध्याय महाराज का। सातवे दिन गुरुवार को बारह शिवलिंगों की उत्त्पति और महत्व का वर्णन और व्यास पूजन किया गया।

कथावाचक कार्ष्णि मयंक उपाध्याय ने कहा कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तभी भगवान शिव अनंत अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए। दोनों देवता उसका आदि और अंत खोजने में असफल रहे। तब उन्हें शिव की महिमा का ज्ञान हुआ। ज्योतिर्लिंग वह दिव्य प्रकाश स्वरूप है जिसमें भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं। यह केवल पत्थर का शिवलिंग नहीं, बल्कि शिव के अनंत, निराकार और सर्वव्यापी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव ने अपने भक्तों के कल्याण के लिए भारत के विभिन्न स्थानों पर बारह प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में निवास किया। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन से पापों का नाश तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के मुख्य यजमान आकाश शर्मा व रेखा शर्मा है। शिव महापुराण का समापन गुरुवार को व्यास पूजन के साथ किया गया। कथा समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महंत गोपी गुरु, पुष्कल गुप्ता, डॉ. दीपेश उपाध्याय, मनीषा वत्स, कमलेश शर्मा, अशोक नेताजी, प्रेम वर्मा, गीता सिंघल, ख्याति शर्मा, अरुंधति शर्मा, प्रेष बत्रा आदि मौजूद रहे।

