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किडनी कैंसर से डरने की नहीं समय पर पहचान की जरूरत

धूम्रपान से दूरी और किडनी-फ्रेंडली डाइट अपनाने की सलाह दी जाती है।

आगरा: किडनी कैंसर, जिसे मेडिकल भाषा में रीनल सेल कार्सिनोमा (RCC) कहा जाता है, आज दुनिया भर में एक तेजी से उभरती स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यह कैंसर किडनी के फंक्शनल टिश्यू में विकसित होता है और समय पर इलाज न होने पर आसपास के अंगों तक फैल सकता है। अच्छी बात यह है कि जागरूकता बढ़ने और अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन व MRI जैसी एडवांस्ड इमेजिंग तकनीकों के कारण अब किडनी कैंसर के कई मामले शुरुआती स्टेज में ही पकड़ में आ रहे हैं, जिससे इलाज के बेहतर विकल्प और सर्वाइवल रेट में सुधार संभव हो पाया है। इसके लक्षणों, रिस्क फैक्टर्स और आधुनिक इलाज को समझना समय पर हस्तक्षेप के लिए बेहद जरूरी है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के यूरो-ऑन्कोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी एवं एंडोयूरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. पंकज वाधवा ने बताया “शुरुआती स्टेज में किडनी कैंसर के लक्षण कई बार स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेशाब में खून आना, कमर या पेट के एक तरफ लगातार दर्द, बिना कारण वजन कम होना, लंबे समय तक थकान रहना या पेट के हिस्से में गांठ महसूस होना ऐसे लक्षण हैं जिन पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। किडनी ट्यूमर के कई मामले संयोगवश तब पता चलते हैं, जब किसी अन्य समस्या के लिए जांच कराई जाती है। अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन और MRI से ट्यूमर के आकार और फैलाव का आकलन किया जाता है। कुछ स्थितियों में बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है, जबकि चेस्ट और हड्डियों की इमेजिंग से यह देखा जाता है कि कैंसर कहीं और तो नहीं फैला है।“

डॉ. पंकज ने आगे बताया “एडवांस्ड स्टेज के मामलों में टार्गेटेड थैरेपी और इम्यूनोथैरेपी से अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। टार्गेटेड थैरेपी कैंसर सेल्स की ग्रोथ को रोकती है, जबकि इम्यूनोथैरेपी शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर कैंसर से लड़ने में मदद करती है। इन आधुनिक उपचारों से न केवल सर्वाइवल बढ़ी है, बल्कि मरीजों की क्वालिटी ऑफ लाइफ में भी सुधार हुआ है। इलाज के बाद नियमित फॉलो-अप बेहद जरूरी होता है। तय अंतराल पर इमेजिंग टेस्ट, ब्लड टेस्ट के जरिए किडनी फंक्शन की जांच और कैंसर की वापसी या फैलाव पर नजर रखी जाती है। साथ ही, लंबे समय तक किडनी को स्वस्थ रखने के लिए ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना, धूम्रपान से दूरी और किडनी-फ्रेंडली डाइट अपनाने की सलाह दी जाती है।“

हालांकि सभी किडनी कैंसर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ आसान कदम रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हैं। स्मोकिंग छोड़ना, वजन और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना, पर्याप्त पानी पीना और फल-सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना इसमें अहम भूमिका निभाता है। जिन लोगों के परिवार में किडनी कैंसर का इतिहास या जेनेटिक रिस्क हो, उन्हें खासतौर पर 40 साल की उम्र के बाद नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

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