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मौसम परिवर्तन इंटरनेट

मौसम का मनोदशा पर प्रभाव: एक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

मंजु शर्मा (विशेष शिक्षक,परामर्शदाता एवं मनोवैज्ञानिक)

मौसम हमारे मन, भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। ऋतु परिवर्तन, विशेष रूप से सर्दियों का मौसम, कई लोगों की मनोदशा और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है। इस स्थिति को सामान्य रूप से विंटर ब्लूज़ कहा जाता है और गंभीर मामलों में यह सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर (Seasonal Affective Disorder – SAD) का रूप ले सकती है।

सर्दियों में धूप की कमी और उदास मौसम के कारण व्यक्ति उदासी, थकान, तनाव और ऊर्जा की कमी महसूस कर सकता है। इसका मुख्य कारण सूर्य के प्रकाश की कमी है, जिससे शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है। सेरोटोनिन मूड को नियंत्रित करता है और इसके असंतुलन से अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। साथ ही, मेलाटोनिन हार्मोन में बदलाव नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकता है, जिससे व्यक्ति सुस्त और कम सक्रिय महसूस करता है।

ठंड  के मौसम में सामाजिक संपर्क भी कम हो जाता है। लोग अधिकतर घर के अंदर रहना पसंद करते हैं, जिससे बातचीत और मेल-जोल घटता है। इसका परिणाम सामाजिक दूरी, अकेलापन और भावनात्मक अलगाव के रूप में देखने को मिलता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को और प्रभावित करता है।

सर्दियों में जीवनशैली में आने वाले बदलाव भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। बाहर की गतिविधियों में कमी, शारीरिक व्यायाम का अभाव और खानपान की आदतों में परिवर्तन मनोदशा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक घर में रहना और कम सक्रिय रहना व्यक्ति को मानसिक रूप से थका हुआ और उदास बना सकता है।

परंतु विंटर ब्लूज़ और SAD से कुछ उपाय को अपनाकर इस के प्रभाव को कम किया जा सकता हैं जैसे—लाइट थैरेपी SAD का एक कारगर तरीका है। इसमें SAD लैम्प या तेज रोशनी का उपयोग किया जाता है, जो धूप की कमी की भरपाई करता है और मूड को बेहतर बनाता है।

शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी बहुत आवश्यक है। योग, स्ट्रेचिंग, नृत्य या अन्य हल्के इनडोर व्यायाम ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक संतुलन में मदद करते हैं ।सामाजिक संपर्क बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत, मुलाकात, फोन कॉल या ऑनलाइन खेल जैसी गतिविधियाँ अकेलेपन को कम करती हैं।

माइंड फुलनेस और सेल्फ-केयर पर ध्यान देना भी लाभकारी होता है। जैसे ध्यान (मेडिटेशन), रिलैक्सेशन तकनीकें, गरम पानी से स्नान, और पसंदीदा शौक जैसे पेंटिंग, कुकिंग, बुनाई आदि मानसिक सुकून प्रदान करते हैं और तनाव को कम करते हैं।

यही नहीं यह मौसम सामान्य बच्चों, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे समय में उन्हें अधिक धैर्य, समझ और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता होती है। इसलिए उनकी क्षमता और ज़रूरतों के अनुसार गतिविधियों और दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए।

हल्के व्यायाम, सरल खेल और संरचित इनडोर गतिविधियाँ उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होती हैं। भोजन भी मनोदशा को प्रभावित करता है—गरम और पौष्टिक आहार मूड को बेहतर बनाने में सहायक होता है, यह एक प्रमाणित तथ्य है।एक संतुलित, सौम्य और नियमित दिनचर्या उन्हें सुरक्षा और स्थिरता का अनुभव कराती है। संभव हो तो मुलाकातें, बातचीत और साथ समय बिताना सामाजिक अलगाव को कम करने में मदद करता है।इस तरह हम कह सकते हैं कि 

सर्दियों का मौसम मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जागरूकता और सही उपायों से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पर्याप्त रोशनी, शारीरिक गतिविधि, सामाजिक जुड़ाव, आत्म-देखभाल और भावनात्मक सहयोग के माध्यम से विंटर ब्लूज़ और सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर को प्रभावी रूप से संभाला जा सकता है।

फोटो मंजू शर्मा

 

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