चंद्रशेखर आजाद रैली में भीड़ देखकर हुए गदगद , किये बड़े सियासी ऐलान
चंद्रशेखर आजाद रैली में भीड़ देखकर हुए गदगद , किये बड़े सियासी ऐलान
आगरा। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद चंद्रशेखर आजाद ने रविवार को आगरा में विधानसभा चुनाव से पहले जीआईसी मैदान में जोरदार रैली कर शक्ति प्रदर्शन किया। रैली में आगरा और सहित आसपास के जिलों से हजारों कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे। भीड़ को देखकर प्रशासन की तैयारियां चरमराती नजर आईं, वहीं कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था की स्थिति भी बन गई। रैली को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आज की भीड़ देखकर प्रशासन की नींद उड़ गई होगी, तभी रामलीला मैदान में रैली नहीं होने दी गई। उन्होंने समर्थकों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि “ये भीड़ नहीं, मेरा परिवार" है। थोड़ी व्यवस्था संभाल लो। आज थोड़ा कष्ट सह लोगे तो आने वाले सैकड़ों साल यह पीड़ा आपके आसपास नहीं आएगी।
यूजीएस संशोधन वापस हुआ तो दलित समाज सड़कों पर उतरेगा
उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार में बच्चियों की ओर आंख उठाने वालों के खिलाफ पुलिस को पूरी छूट होगी। महंगाई पर तंज कसते हुए बोले “15 लाख खाते में नहीं आए, लेकिन सोना 15 लाख तक जरूर पहुंच जाएगा।” यूजीएस (संशोधन) के विरोध पर उन्होंने कहा कि शोषित-वंचितों का हक मारने वाले ही इसका विरोध कर रहे हैं, संशोधन वापस हुआ तो दलित समाज सड़कों पर उतरेगा।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आजाद समाज पार्टी की सरकार बनने पर अपने लोगों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएंगे। गरीबों को मुफ्त शिक्षा और मुफ्त इलाज मिलेगा। आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म की जाएगी। संविदा कर्मियों को नियमित नौकरी या 50 हजार वेतन वाली पक्की नौकरी दी जाएगी। पिछड़ों और अति पिछड़ों को प्रमोशन में आरक्षण तथा पिछड़ा वर्ग के लिए 15% अलग आरक्षण लागू होगा।
ईसाई समाज पर हो रहे कथित हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी रहेगी। संभल में जज के ट्रांसफर के मुद्दे पर उन्होंने न्यायपालिका को आश्वस्त किया कि पार्टी उनकी सुरक्षा के लिए खड़ी है। दलित समाज पर अत्याचार के मामलों (मेरठ, कानपुर, हाथरस) का हवाला देते हुए एकजुटता का आह्वान किया।
रैली में अव्यवस्था, कार्यकर्ता आपस में भिड़े
भीड़ के दबाव से रेलिंग टेढ़ी हो गईं। मंच पर चढ़ने और नेता की झलक पाने को लेकर कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, लात-घूंसे चले और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। पुलिस को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। समर्थकों को लड़ता देख चंद्रशेखर आजाद ने माइक संभालकर शांति की अपील की।