पितृ पक्ष महोत्सव में श्रद्धा, सेवा,संस्कार के साथ धर्म, अध्यात्म, संस्कार से कार्यक्रम का समापन
पितृ पक्ष महोत्सव 2026’, श्रद्धा, सेवा और संस्कार संगम का समापन
आगरा। पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से ‘दिव्य मंथन’ द्वारा तीन दिवसीय ‘पितृ पक्ष महोत्सव 2026’ का आयोजन 8 से 10 अक्टूबर 2026 श्री महालक्ष्मी मंदिर, यमुना तट, बल्केश्वर, आगरा में किया गया। महोत्सव में धर्म, अध्यात्म, संस्कार और सेवा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आयोजन के दौरान पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान, नारायण बलि, पितृ शांति अनुष्ठान, हवन-पूजन एवं भागवत मूल पाठ कथा सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न हुये। आयोजन का उद्देश्य पितृ पक्ष की परंपराओं एवं उनके धार्मिक महत्व के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना और नई पीढ़ी को सनातन संस्कारों से जोड़ना था। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में पं. प्रिया किशोरी जी (भागवताचार्य) का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। वहीं मोनिका कौशल जी (वास्तु कंसल्टेंट) द्वारा वास्तु एवं जीवन से जुड़े विषयों पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया।
महोत्सव का एक विशेष आकर्षण ‘दिव्य मंथन’ का धर्म एवं आध्यात्मिक भी हुआ, जिसके माध्यम से धर्म, सनातन परंपराओं, भारतीय संस्कारों और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विषयों पर विशेष संवाद किए गए।
इस विशेष श्रृंखला में संतों, धर्माचार्यों, विद्वानों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेष अतिथियों के साथ सार्थक बातचीत के माध्यम से धर्म और सनातन संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल एवं आधुनिक संवाद शैली में नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
आयोजकों ने बताया कि ‘पितृ पक्ष महोत्सव 2026’ केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर श्रद्धा, सेवा, संस्कार और सनातन परंपराओं के संरक्षण का माध्यम बना, इसी उद्देश्य के साथ इसकी रूपरेखा तैयार की गई।
मुख्य वक्ता: पं. प्रिया किशोरी जी (भागवताचार्य) मार्गदर्शन: मोनिका कौशल जी (वास्तु कंसल्टेंट)आयोजक: दिव्य मंथन संस्थापक: श्री विकास रायजादा जी
प्रमुख कार्यक्रम_ पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान, नारायण बलि, पितृ शांति अनुष्ठान, हवन एवं पूजन, भागवत मूल पाठ कथा
धर्म एवं आध्यात्मिक विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक संवाद_
‘श्रद्धा से शांति, सेवा से समृद्धि’ की भावना के साथ आयोजित यह तीन दिवसीय महोत्सव पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा सनातन संस्कारों और परंपराओं को न

