आतंक से परेशान लोग, अजब प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी ऑफिस पहुंचे, प्रदर्शन देख सभी दंग?
मेरठ में नगर निगम-वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन, बंदरों को पकड़ने की ,बंदरों का आतंक… जनता परेशान… और जिम्मेदार विभागों के बीच खींचतान! मेरठ में बंदरों की समस्या से त्रस्त लोगों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया कि हर कोई देखता रह गया। कोई बंदर का मुखौटा पहनकर पहुंचा, तो किसी ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
खबर उत्तर प्रदेश के मेरठ से है, जहां फूलबाग और नेहरू नगर कॉलोनी में बंदरों के बढ़ते आतंक से स्थानीय लोग परेशान हैं। समस्या के समाधान की मांग को लेकर बुधवार को लोगों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।
क्षेत्रीय पार्षद रेखा सिंह और पूर्व पार्षद नीरज सिंह के नेतृत्व में लोग कमिश्नरी चौराहे पर एकत्र हुए। इसके बाद बंदरों के मुखौटे पहनकर नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह को ज्ञापन सौंपा।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले करीब दो महीने से इलाके में 250 से 300 बंदरों का झुंड परेशानी का कारण बना हुआ है। बंदर सड़कों पर बैठकर आवागमन बाधित करते हैं और लोगों को काटने के लिए दौड़ते हैं। इतना ही नहीं, छतों पर रखी पानी की टंकियों को नुकसान पहुंचाने, कपड़े फाड़ने और गमले तोड़ने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बंदरों के डर से बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। लोगों ने मांग की कि बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की व्यवस्था जल्द की जाए।
VO: स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि वन विभाग को बंदरों को छोड़ने के लिए जगह तय करनी है, जबकि नगर निगम को उन्हें पकड़ने की व्यवस्था करनी है। लेकिन दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा जनता भुगत रही है।
वहीं, वन विभाग की प्रभागीय निदेशक वानिकी वंदना फोगाट के मुताबिक, बंदरों के लिए शहर के बाहरी इलाकों में कपि वन और अन्नपूर्णा वन विकसित करने की योजना है। इसके लिए दौराला, मोहिउद्दीनपुर, रजपुरा और परतापुर में जमीन चिन्हित की गई है। प्रत्येक कपि वन करीब पांच हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा, जहां फलदार और छायादार पौधे लगाए जाएंगे।
वन विभाग का कहना है कि बंदरों को छोड़ने के लिए नगर निगम की ओर से अभी लिखित पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद उपयुक्त स्थान की अनुमति पर

