80 की उम्र, 100 चुनाव और हार का सिलसिला… फिर भी नहीं थमा हसनूराम अंबेडकरी का जुनून
80 की उम्र, 100 चुनाव और हार का सिलसिला… फिर भी नहीं थमा हसनूराम अंबेडकरी का जुनून!
100 बार चुनाव… फिर मैदान में!
80 साल के हसनूराम का जुनून
आगरा में एमएलसी चुनाव का बिगुल बज चुका है… नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही एक ऐसा चेहरा सामने आया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
हाथ में छड़ी… गले में गमछा… बदन पर खादी का कुर्ता और चेहरे पर चुनाव लड़ने का वही पुराना जुनून।
ये कोई आम प्रत्याशी नहीं, बल्कि हसनूराम अंबेडकरी हैं… उम्र करीब 80 साल और दावा है कि वह अब तक करीब 100 चुनाव लड़ चुके हैं।
खास बात ये है कि हसनूराम अंबेडकरी लगभग हर बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरते हैं। चुनाव कोई भी हो, मैदान कितना भी बड़ा हो और सामने उम्मीदवार कितना भी मजबूत हो… हसनूराम का हौसला कम नहीं होता।
अब एक बार फिर यूपी में विधान परिषद के खंड शिक्षक और खंड स्नातक चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंगलवार को आगरा कमिश्नरी में नामांकन पत्र खरीदने पहुंचे हसनूराम अंबेडकरी ने एक बार फिर साफ कर दिया कि उम्र उनके चुनावी जुनून के सामने आड़े नहीं आने वाली।
हसनूराम की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ छोटे चुनाव ही नहीं लड़े। ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर राष्ट्रपति पद के चुनाव तक उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई है।
कई चुनावों में हार मिली… लेकिन हर हार के बाद हसनूराम फिर खड़े हुए। उनके लिए शायद चुनाव सिर्फ जीत हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी आवाज दर्ज कराने का एक तरीका है।
आगरा कमिश्नरी में जब हसनूराम नामांकन पत्र लेने पहुंचे तो उनके हाथ में छड़ी थी, लेकिन इरादे आज भी मजबूत नजर आए।
80 साल की उम्र में जहां लोग चुनावी राजनीति से दूरी बनाने लगते हैं, वहीं हसनूराम अंबेडकरी करीब 100वीं बार चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
उनकी कहानी में सबसे ज्यादा चर्चा हार की नहीं, बल्कि हर बार हार के बाद दोबारा मैदान में लौटने के जज्बे की है।
ईटीवी भारत ने नामांकन पत्र खरीदने पहुंचे हसनूराम अंबेडकरी से खास बातचीत की। उन्होंने अपनी जिंदगी, चुनावी सफर और लगातार चुनाव लड़ने के पीछे की वजह के बारे में खुलकर बात की।
तो आखिर कौन हैं हसनूराम अंबेडकरी?
क्यों वह बार-बार निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं?
करीब 100 चुनाव लड़ने के बाद भी उनका हौसला क्

