धर्म-संस्कृति
पितरो की अतृप्ति क्या पृथ्वी पर भयंकर उत्पात लाती है जानते है डॉ सुमित्राजी से
मृत्यु एक अटल और अचल सत्य है। जहाँ एक तरफ हम ये जानते है की मृत्यु पे व्यक्ति का वश नहीं होता है वही दूसरी तरफ हम महाभारत के प्रमुख पत्र भीष्म पितामह को भी जानते है जिनको इक्छा मृत्यु प्राप्त थी। भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से अपने प्राण त्यागे थे। करीब 58 दिनों तक मृत्यु शैया पर लेटे रहने के बाद जब सूर्य उत्तरायण हो गया तब माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म पितामह ने अपने शरीर को छोड़ा था।

