मुर्दा’ चला रहा था स्कूटर, शिकायत पर 13 साल बाद कोर्ट में आत्मसमर्पण, भेजा गया जेल
आगरा में धोखाधड़ी के एक मामले में बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस व्यक्ति को दस्तावेजों में मृत दर्शाकर उसके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्रवाई को खत्म कराने का आरोप है, वही व्यक्ति 13 साल बाद सड़क पर स्कूटर चलाता हुआ दिखाई दिया। वादी पक्ष ने उसे स्कूटर चलाते हुए देखा तो उसका फोटो खींच लिया और उसके जीवित होने के साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए। मामले में कार्रवाई आगे बढ़ी तो आरोपित ने सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसका जमानत प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए उसे जेल भेज दिया।
मामला आगरा के गांधी नगर और न्यू आगरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोपित ताराचंद शर्मा निवासी नगला बैनी प्रसाद, गांधी नगर पर वर्ष 1999 से धोखाधड़ी का मुकदमा चल रहा था। आरोप है कि उसने फर्जी वसीयत तैयार की थी। इस मामले में कोर्ट ने एक सितंबर 1999 को ताराचंद शर्मा को तलब किया था। बाद में उसने हाईकोर्ट से भी राहत लेने का प्रयास किया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली।
कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया
सोमवार को ताराचंद शर्मा ने अदालत में आत्मसमर्पण किया और खुद को निर्दोष बताते हुए जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवा नंद गुप्ता की अदालत में हुई। वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर भटनागर ने आरोपित के जीवित होने से संबंधित साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए।
वादी पक्ष ने अदालत को बताया कि ताराचंद शर्मा के जीवित होने का प्रत्यक्ष प्रमाण उस समय सामने आया, जब छह फरवरी 2026 को उसे गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटर चलाते हुए देखा गया। वादी पक्ष ने मौके पर उसका फोटो भी खींचा। इसके बाद मामले को अदालत के संज्ञान में लाया गया।
वादी के अधिवक्ता ने न्यायालय के 20 मार्च 2026 के आदेश का भी हवाला दिया। इसी आदेश के आधार पर आरोपित के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे। सुनवाई के बाद अदालत ने ताराचंद शर्मा का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया और उसे जेल भेजने के आदेश दिए।
झूठे मृत्यु प्रमाण पत्र का लगाया गया आरोप
वादी राजकुमार वर्मा ने वरिष्ठ अधिवक्ता समीर भटनागर के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें विपक्षी ताराचंद शर्मा, गिरीश चंद शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा, पुलिसकर्मियों, घनश्याम दास और राजकुमार वर्मा के विरुद्ध का

